सेक्रेटरी ने डेटा चोरी कर पेटीएम के फाउंडर से मांगे 20 करोड़ रुपए, थाईलैंड से करवाया ब्लैकमेलिंग कॉल
पेटीएम के फाउंडर विजय शेखर शर्मा और उनके भाई अजय शेखर को ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सेक्रेटरी सोनिया धवन ने डेटा चोरी कर उसे सार्वजनिक करने की धमकी दी। इसके एवज में 20 करोड़ रुपए की मांग रखी। पुलिस ने सोनिया समेत 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। एक आरोपी फरार बताया जा रहा है। अजय शेखर के मुताबिक, 20 सितंबर को पहली बार थाईलैंड के वर्चुअल नंबर से डेटा लीक करने के लिए धमकी भरा फोन आया था दूसरे दिन उसी नंबर से विजय के पास भी फोन आया।
कॉल ट्रेस नहीं कर पा रही थी पुलिस : अजय ने बताया कि इस कॉल को इजरायल के आईटी एक्सपर्ट की मदद से ट्रेस किया गया। दरअसल पुलिस वर्चुअल नंबर को ट्रेस नहीं कर पा रही थी, इसलिए कंपनी के अधिकारियों ने इजरायल के एक्सपर्ट से मदद ली, तब जाकर कोलकाता में रहने वाले आरोपी की असलियत सामने आई।
आरोपियों ने 20 करोड़ रुपए मांगे : नोएडा के एसएसपी अजय पाल शर्मा के मुताबिक, "पेटीएम के मालिक ने एक महिला और उसके सहयोगियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कंपनी का डेटा चुराए जाने और ब्लैकमेलिंग की बात कही थी। आरोपियों ने उनसे 20 करोड़ रुपए की मांग रखी थी। हमने तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज की। तुरंत कार्रवाई करते हुए महिला समेत 3 लोगों को अरेस्ट कर लिया।"
अजय के मुताबिक, ब्लैकमेलिंग एक अक्टूबर से शुरू हुई थी। हमने 10 अक्टूबर को महज 67 रुपए आरोपी के अकाउंट में डालकर उसके बैंक की डिटेल ली। फिर 15 अक्टूबर को 2 लाख रुपए उनके बताए बैंक अकाउंट में जमा भी करा दिए। इससे आरोपियों का हौसला बढ़ गया। फिर हमने पुलिस में शिकायत की।
ऐसे मामले का खुलासा हुआ : अजय शेखर ने बताया कि ब्लैकमेल करने वाले कोलकाता के आरोपी रोहित चोमल को पैसे देने के बाद नोएडा पुलिस को जानकारी दी गई। पड़ताल में पता चला कि सोनिया, रूपक और कंपनी का एडमिन देवेंद्र तीनों मिलकर रोहित के साथ इस साजिश में शामिल हैं। इसलिए सेक्टर-20 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
च्चे को बताएं कि अनजान व्यक्ति ई-मेल का जवाब दें और न ही ऐसी मेल के ओपिनियन पोल के प्रश्नों का जवाब दें इसके बाद यदि कोई परेशान करें तो परिजन व शिक्षक को सूचित करें।
टीचर और पेरेंट्स को भी बच्चों पर ध्यान रखना चाहिए। बच्चों की मेमोरी में कोई भी बात डालने के लिए समय-समय पर साइबर अपराध के संबंध में जागरूक करें।
पेरेंट्स बच्चों को समय-समय पर ऑनलाइन दोस्त के संबंध में जानकारी रखें। बच्चे के साथ बात करने वाले से दोस्तों से वे भी बातचीत करें ताकि उन्हें पता हो कि पेरेंट्स उस पर नजर रखे हुए हैं।
क्राइम होने पर दर्ज कराएं शिकायत
अगर बच्चे के साथ कोई इंटरनेट के माध्यम से गलत व्यवहार करता है तो उसके खिलाफ तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। सूचना तकनीक कानून 2000 (आईटी एक्ट 2000) में इसके लिए प्रावधान किया गया है। इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत पुलिस में भी केस दर्ज कराया जा सकता है। अगर पुलिस शिकायत नहीं दर्ज करती है तो वकील की मदद से सीधे अदालत में मुकदमा दायर कर सकते हैं।
कॉल ट्रेस नहीं कर पा रही थी पुलिस : अजय ने बताया कि इस कॉल को इजरायल के आईटी एक्सपर्ट की मदद से ट्रेस किया गया। दरअसल पुलिस वर्चुअल नंबर को ट्रेस नहीं कर पा रही थी, इसलिए कंपनी के अधिकारियों ने इजरायल के एक्सपर्ट से मदद ली, तब जाकर कोलकाता में रहने वाले आरोपी की असलियत सामने आई।
आरोपियों ने 20 करोड़ रुपए मांगे : नोएडा के एसएसपी अजय पाल शर्मा के मुताबिक, "पेटीएम के मालिक ने एक महिला और उसके सहयोगियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कंपनी का डेटा चुराए जाने और ब्लैकमेलिंग की बात कही थी। आरोपियों ने उनसे 20 करोड़ रुपए की मांग रखी थी। हमने तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज की। तुरंत कार्रवाई करते हुए महिला समेत 3 लोगों को अरेस्ट कर लिया।"
अजय के मुताबिक, ब्लैकमेलिंग एक अक्टूबर से शुरू हुई थी। हमने 10 अक्टूबर को महज 67 रुपए आरोपी के अकाउंट में डालकर उसके बैंक की डिटेल ली। फिर 15 अक्टूबर को 2 लाख रुपए उनके बताए बैंक अकाउंट में जमा भी करा दिए। इससे आरोपियों का हौसला बढ़ गया। फिर हमने पुलिस में शिकायत की।
ऐसे मामले का खुलासा हुआ : अजय शेखर ने बताया कि ब्लैकमेल करने वाले कोलकाता के आरोपी रोहित चोमल को पैसे देने के बाद नोएडा पुलिस को जानकारी दी गई। पड़ताल में पता चला कि सोनिया, रूपक और कंपनी का एडमिन देवेंद्र तीनों मिलकर रोहित के साथ इस साजिश में शामिल हैं। इसलिए सेक्टर-20 थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
च्चे को बताएं कि अनजान व्यक्ति ई-मेल का जवाब दें और न ही ऐसी मेल के ओपिनियन पोल के प्रश्नों का जवाब दें इसके बाद यदि कोई परेशान करें तो परिजन व शिक्षक को सूचित करें।
टीचर और पेरेंट्स को भी बच्चों पर ध्यान रखना चाहिए। बच्चों की मेमोरी में कोई भी बात डालने के लिए समय-समय पर साइबर अपराध के संबंध में जागरूक करें।
पेरेंट्स बच्चों को समय-समय पर ऑनलाइन दोस्त के संबंध में जानकारी रखें। बच्चे के साथ बात करने वाले से दोस्तों से वे भी बातचीत करें ताकि उन्हें पता हो कि पेरेंट्स उस पर नजर रखे हुए हैं।
क्राइम होने पर दर्ज कराएं शिकायत
अगर बच्चे के साथ कोई इंटरनेट के माध्यम से गलत व्यवहार करता है तो उसके खिलाफ तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। सूचना तकनीक कानून 2000 (आईटी एक्ट 2000) में इसके लिए प्रावधान किया गया है। इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) की संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत पुलिस में भी केस दर्ज कराया जा सकता है। अगर पुलिस शिकायत नहीं दर्ज करती है तो वकील की मदद से सीधे अदालत में मुकदमा दायर कर सकते हैं।
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